शनिवार, 28 अगस्त 2010

जिन्दगी कुछ और वक्त दे मुझे ..........

जिन्दगी कुछ और वक्त दे मुझे ,
बिखरे पडे है पल कुछ अफसानों के मेरे उन पलो को जी कर समेटने दे मुझे ।

सदियॉ जी जाऊ ये चाहत नही मेरी ,
हथेली मे गिन सकू, उन पलों को सदीया बनाने दे मुझे ।

खाली पडे हे अंश जीवन के मेरे ,
प्यार की स्याही से उन्हे कलमबधं कर देने दे मुझे ।

जिन्दगी कुछ और वक्त दे मुझे ........

कहकहो मे उलझा रहा में अब तक
अफसानो के नगर मे एक सफर कर देने दे मुझे ।

उम्र से पहले ही , कुछ मोडो से गुजर गया था मैं
जिन्दगी मेरी साथी बन उन मोडो का फिर दीदार करा दे मुझे ।